CITYSAMCHARDIGITAL
ECC एजुकेटर भर्ती में धांधली का आरोप: एक अभ्यार्थी ने पैसे लेकर काउंसलिंग कराने का लगाया आरोप। कहा योग्य अभ्यर्थी सूची से बाहर! @topfans MYogiAdityanath #संतकबीरनगर। एक तरफ योगी सरकार उत्तर प्रदेश में जीरो टॉलरेंस के दावे करती है तो वही संतकबीरनगर जिला जीरो टॉलरेंस नीति को फेल कर योगी सरकार की मनसा पर पलीता लगाने का कार्य कर रहा है। ताजा मामला ECC एजुकेटर भर्ती में भारी धांधली से जुड़ा है। ग्राम मुखलिसपुर निवासी ईसीसी एजुकेटर अभ्यर्थी कु. पूजा पत्नी राहुल कुमार ने बीएसए कार्यालय पर शिकायत दर्ज कराते हुए ईसीसी एजुकेटर भारती की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने 111 पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सभी दस्तावेजों की हार्ड कॉपी 3 मई 2025 को बीएसए कार्यालय में जमा कराई थी । पूजा का कहना है कि उनकी मेरिट 70.93% होने के बावजूद उनका नाम चयन सूची में शामिल नहीं किया गया, जबकि कम अंकों वाले अभ्यर्थियों को काउंसलिंग के लिए बुलाया गया। शिकायतकर्ता पूजा ने यह भी खुलासा किया कि उन्हें दो महीने पहले एक अननोन नंबर से एक लाख रुपये देने का दबाव बनाया गया था। पूजा ने उसे व्यक्ति को योगी सरकार के जीरो टॉलरेंस नीति का हवाला देते हुए रुपये न देने का हवाला दिया। पूजा का कहना है कि उसने फोन पर ₹100000 देने से मना कर दिया तो उसका नाम सूची से गायब कर दिया गया। पीड़ित का आरोप है कि प्रार्थना को असर उजाला पेपर के माध्यम से सूचना मिली तो प्रार्थना भागी-भागी BSA कार्यालय पहुंची तो पता चला की प्रार्थना का भी सूची में नाम नहीं हैं। प्रार्थना को दो महीने पहले फोन आया था यदि एजुकेसन में भर्ती होना है तो एक लाख कुण उपलब्ध कहा दिजीए। प्रार्थना ने रूट देने से मना कर दिया प्रथिने बोली की मेरी मेरिट अच्छी है मेरा वैसे ही हो जायेगा रुपया नहीं दूंगी प्रथिने की मेरिट हाईस्कूल 427/600 - 71.16 व इण्टरमिलिए 395/500 -79% बी050 अंतिम वर्ष विषय होम साइंस, संस्कृत) 1131/180 -62.63 सम्पूर्ण फाइनल गुणांक 70.93% आ रहा है। जबकि प्राथीगण से कम गुणांक के अभ्यर्थी को फोनकर काउंसलिंग कराया गया हैं। जो कि सरासर गलत है। मनमाने तरीके से भर्ती करायी जा रही है। अतः आप श्रीमान जी से निवेदन है कि प्रार्थना के साथ हो रहे अन्याय को देखते हुये मेरिट गुणांक को सार्वजनिक कराते हुये निष्पक्ष तरीके से योग्य अभ्यर्थियों का चयन कराना सुनिश्चित करे साथ ही फर्म NIT मऊ पर आवश्यक कानूनी कार्यवाही करने की मांग की है। इस पूरे प्रकरण से चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ खड़े हो गए हैं। अभ्यर्थियों ने पारदर्शी जांच और मेरिट सूची सार्वजनिक करने की मांग की है।